जौनपुर। स्थानीय शहर के नईगंज स्थित इडुनिक पब्लिकेशन पब्लिशर्स द्वारा आयोजित एकदिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजित किया गया। जिस सेमिनार का मुख्य विषय”विभिन्न स्तर पर शिक्षण अधिगम रहा।
जिस शोध में एनईपी 2020 का निहितार्थ,प्रभाव एवं उपयोगिता” रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रोफेसर अजय कुमार चतुर्वेदी पूर्व प्रोवीसी वीर टिकेंद्रजीत विश्वविद्यालय इंफाल (मणिपुर) एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया ।इडुनिक पब्लिकेशन द्वारा यह नेशनल सेमिनार रिवर व्यू होटल, जौनपुर में कराया गया।
एक दिवसीय नेशनल सेमिनार कुल दो सत्र में हुआ। इस सेमिनार जिसका आयोजन डाक्टर अरविन्द कुमार यादव प्राचार्य श्री भागवत प्रसाद सिंह मेमोरियल बी एड कालेज देव मोड़ औरंगाबाद (बिहार) ने कराया था। इसमें उत्तर प्रदेश,बिहार,झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश,उत्तराखंड आदि राज्यों से चौदह शोधकर्ताओं ने प्रत्यक्ष पेपर प्रजेंटेशन दिया।आफलाइन मोड में छिहत्तर शिक्षा प्रेमी तथा आनलाइन मोड में सैकड़ों लोगों ने सहभागिता रही।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर अजय कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि मातृभाषा जिसे पालने की भाषा भी कहते हैं,उसी में प्रारंभिक शिक्षा दिया जाए तभी आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर होगा,क्योंकि बच्चे शुरुआत में मां के हाव से सीखते हैं। बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं वैसे वैसे माता पिता,परिवार,पड़ोस आदि के सम्पर्क में आने लगते हैं और उसे उन सभी की बोली,भाषा,विचार,व्यवहार से सीखता है।
उन्होंनें कहा कि दुनिया के कई देशों ने अपने-अपने देश की मातृभाषा को बढ़ावा दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया गया है। इससे पूर्व उद्घाटन वक्तव्य लाल साहब यादव शिक्षक-शिक्षाविद पूर्व एआरपी बख्शा,जौनपुर ने नेशनल सेमिनार में सहभागिता करने वाले सभी शोधकर्ताओं,शिक्षकों,विषय विशेषज्ञों एवं अतिथियों को विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि यह नेशनल सेमिनार ज्वलंत मुद्दा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर केंद्रित है। आज की इस सभा में विद्वानों के चिंतन मंथन से विभिन्न स्तर की शिक्षा व्यवस्था,शिक्षक,संसाधन आदि को समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि विद्या एवं उसका केन्द्र विद्यालय बच्चों की शिक्षा, संस्कार,विचार,व्यवहार एवं सार्वभौमिक विकास का मुख्य अस्त्र शस्त्र है।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर राकेश कुमार यादव पूर्व समन्वयक एनएसएस वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर ने अपने अभिभाषण में कहा कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में शिक्षा ही मानवीय जीवन के पुनरुत्थान का आधार रही है और है भी। शिक्षा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देश काल एवं परिस्थितियों के अनुसार करवट बदलती रहती है।
इक्कीसवीं सदी की मांग है कि अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के साथ साथ मातृभाषा,क्षेत्रीय भाषा एवं राष्ट्रीय भाषा को महत्व दिया जाएं। प्राचीन धर्मग्रंथो वेद,पुराण, उपनिषद,शिलालेखों,अन्य साहित्य आदि के व्यावहारिक पहलुओं को जानना आवश्यक है,इसीलिए विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परंपरागत साहित्य को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
पूर्व प्राचार्य एसडीटीटीसी,हजारीबाग झारखंड ने कहा कि शिक्षा का शाब्दिक अर्थ सीखना और सीखाना होता है इसके साथ एक और अर्थ यह है कि शिक्षा बालक की जन्मजात शक्तियों को बाहर निकालकर उसे भविष्य के तैयार करती है।
शिक्षा विशेषज्ञ प्रोफेसर डाक्टर योगेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा साध्य है साधन नहीं। शिक्षा वास्तव में उपभोग है निवेश नहीं मगर आज जनमानस में शिक्षा को साधन और निवेश दोनों हो गई है। यही कारण है कि शिक्षा के विभिन्न अंगों जैसे छात्र, शिक्षक,पाठ्यक्रम,तकनीकी आदि के मूल स्वरूप बदल गया है। वर्तमान शिक्षा बाल केंद्रित है सभी शिक्षकों, अभिभावकों, माता पिता को बच्चों की जन्मजात शक्तियों को बाहर निकालने के लिए कार्य करना चाहिए। बच्चों से मित्रवत, सलाहकार की भूमिका निभानी चाहिए उन्हें स्वयं सीखने का, करके सीखने का अवसर दिया जाए।
तथा डाक्टर विजय राज यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षकों को सचेत करती है कि वह सब मिलकर शिक्षा के बाजारीकरण को रोकें जिससे गरीब और अमीर के बच्चे एक साथ सामान्य शिक्षा प्राप्त कर सके। शैक्षिक विभेद रोकने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। विषय विशेषज्ञ जय किशुन यादव ने कहा कि वास्तव में शिक्षा हमारे समाज के लिए निर्णायक है जैसी शिक्षा होगी वैसा समाज होगा। सामाजिक जीवनयापन,रहन सहन, विचार व्यवहार का आधार शिक्षा है।सामाजिक विकास एवं पुनर्निर्माण के साथ साथ चरित्र निर्माण का प्रमुख साधन है।
इस सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर अजय कुमार दूबे ने राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार का आयोजन होने से हम शिक्षकों तथा विभिन्न स्तर के एमए एमएड छात्रों, शोधकर्ताओं एवं विषय विशेषज्ञों को शिक्षण में सुधार करने, नवप्रवर्तन करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन डाक्टर बृजबिहारी यादव,प्रवक्ता संस्कृत जीआईसी,कोडरमा,(झारखंड)ने किया,और धन्यवाद ज्ञापन इडुनिक पब्लिकेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर राजकुमार यादव ने किया।
इस अवसर पर इडुनिक पब्लिकेशन की दो पुस्तकों बाल्यावस्था एवं उसका विकास तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समग्र अध्ययन का विमोचन भी हुआ तथा शैलेश कुमार नायब तहसीलदार, आजमगढ़,एनएसएस समन्वयक प्रोफेसर राजबहादुर यादव,शिक्षक समाजसेवी दिनेश कुमार,शिक्षक नेता श्रवण कुमार,अवधेश कुमार, डाक्टर संजय यादव,मस्तराम यादव, मांधाता,धीरेन्द्र,भारतेन्दु, मैनबहादुर,शतेन्द्र,अनुराग कुमार,संतोष पाण्डेय,विनय सिंह,प्रिंस शर्मा आदि विद्वतजन उपस्थित रहे।


