मऊ ।जनपद के चिरैयाकोट स्थित बाबा हजरत मुहम्मद मखदूम का उर्स धूमधाम के साथ मना,जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।जहां सुरक्षा के कड़े बन्दोबस्त देखा गया।
विदित हो कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ईस्माइल हसन अब्बासी साहब का 624 वां उर्स बड़ी धूम-धाम के साथ बुधवार को मनाया गया,जिसमें नगर व उसके आस-पास के गांवों के हजारों की तादाद में हिन्दू -मुस्लिम महिलाएं व बच्चों ने भाग लिया।जो अपने साथ अकीकद व भाई चारा का परिचय दिया।
इस दौरान लोगों का हुजूम अल सुबह से ही मजार पर इकठ्ठा होने लगा था तथा तकिया बाजार व अन्य मुस्लिम बस्तियों से लोग चादर,गागर वाली जुलूस का हुजूम लेकर बाबा दरबार पहुँचे तथा वहां पर कुरान खुबानी व कुल शरीफ के साथ मकरीब और जलसा का ऐहतमाम किए। जिसकी निजामत मौलाना अक्ख्तर ने की।तथा हाशिम सजाद,मौलाना अख्तरूल इस्लाम ,नासिर रजा,मौलाना अक्खतर, ने नातीया कलाम पेश किया। बाद इसके मौलाना हजरत, मौलाना अफरोज,मौलाना मकबूल , अजहरूल इस्लाम साहब,मौलाना ,अजहरी,मौलाना हाफिज शमीम,मौलाना फारुख,मास्टर इकबाल अहमद,मौलाना अब्दुरफ , मौलाना अनवर ,मौलाना अक्ख्तर ने कहा कि हज़रत मखदूम ने अपना जीवन अमन शांति व भाई -चारा कॊ बढ़ाने मे व्यतीत किया और अन्याय जुल्म से इस कस्बे कॊ निजात दिलाई।वे एक सूफी संत थे,खारी देश के अदन से इब्राहिम शाह शर्की के शासन काल मे अपनी जागीर दारी कॊ छोड़ कर दिल्ली,जौनपुर होते हुय चिरैयाकोट तशरीफ़ लाये और चेरू कौम जो बहुत ही जालिम कौम कही जाती थी। जिसका मकबराआज भी यहां पर स्थित है।उससे जंग की और चिरैयाकोट के लोगों को आजाद कराया। इसी लिये चिरैयाकोट को’फ़तेह चिरैयाकोट’भी कहते हैं ।इस मौके पर रौजा कमेटी के अलावा क्षेत्र के पूर्व प्रधान अब्दुल सत्तार
कुरैशी,हाजीजमालुद्दीन,इकबाल,मकसूद,इरशाद,इंसाफ,अब्बासअली,सूकूरूल्ला,महबूबआलम,मोहम्मदइदरीस,अब्दुल बसर,मुनीर शाह,शाकिर हुसैन,अनीस खान, इस्लाम कुरैशी आदि लोग मौजूद रहे ।


