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मऊ:भाजपा नेता के प्रभाव से पुलिस आई दबाव में – कपड़ा व्यवसायी के विरुद्ध किया दर्ज केस

मऊ। जनपद के चिरैयाकोट थाने में एक कपड़ा व्यवसायी के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा पंजीकृत होने की खबर है।हालांकि उक्त मामले में भाजपा नेता के दबाव में आकर हुई पुलिसिया कार्रवाई चर्चाए- खास में है।
मिली जानकारी अनुसार स्थानीय थाना पुलिस ने क्षेत्र अंतर्गत मगही सरसेना निवासिनी दुर्गा चौहान की तहरीर पर बाजार स्थित एक कपड़ा कारोबारी के ऊपर धोखाधड़ी का फर्जी मुकदमा दर्ज किया है,जिसमें वादिनी द्वारा कहा गया है कि आरोपित लखनऊ पीजीआई अस्पताल में इलाज करवाने में मदद के नाम पर पैसे लिया था जो वापस नहीं किया है।
पुलिस में दी गई तहरीर में कहा गया है कि करीब 8/9 वर्ष पहले मैं तत्कालीन विधायक बैजनाथ पासवान से अपने परिवारजन की किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से सहयोग की मांग लेकर मिलने गई थी,तो वहां पर मौजूद रामू चौहान निवासी ग्राम चल्हा थाना रानीपुर जनपद मऊ ने मुझे पीजीआई में अपने रिलेटिव के होने की बात कह कर पैसे की मांग किए, जिसके लिए हमने उनको कयी चरण में कुल रुपए 55000 दे दिए।
किंतु उनके द्वारा कहे अनुसार कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई और ना ही आज तक पैसा दिया गया। जिस सम्बंध में दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने रविवार को उपरोक्त आरोपित कपड़ा व्यवसायी रामू चौहान के विरुद्ध धारा 420 ,406 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जांच की कार्रवाई शुरू की है। किंतु जनचर्चा अनुसार घटना का दूसरा पहलू अहम है जिसपर गौर फरमाया जाए तो इस मुकदमें में षड्यंत्र की बू आती है।
बताते हैं कि आरोपित अपने गांव स्थित सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बनाए गए मकानों के ध्वस्तीकरण की लड़ाई प्रशासन से लड़ रहा है जिससे बचने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेता द्वारा खड्यंत्र के साथ यह मुकदमा दर्ज कराया है। उक्त के संबंध में बताया गया कि चाल्हा ग्राम पंचायत में दर्जनों ऐसे लोग हैं जो सरकारी जमीन पर अपने मकान बना रखे हैं जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेता रामविलास चौहान का भी मकान आता है।
गांव निवासी रामू चौहान पिछले कुछ दिनों से उक्त सभी सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की लड़ाई लड़ रहे हैं जिसके लिए उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय में दस्तक दे रखी है।
बताते हैं कि उक्त प्रकरण में न्यायालय की कार्रवाई लगभग अंतिम दौर में चल रही है जिसके कारण भाजपा नेता द्वारा बार-बार समझौते का दबाव बनाया जा रहा है,किंतु इस मुकदमें में आरोपित द्वारा समझौता से इनकार कर जाने के बाद प्रतिशोध में अब उसे सत्ता की हनक और अपने राजनीतिक प्रभाव का असर दिखाते हुए षड्यंत्र के तहत फर्जी मुकदमों में फंसा कर समझौते के लिए बिवस करने का प्रयास माना जा रहा है।

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