Home » ब्रेकिंग न्यूज़ » भू-माफिया पर कार्रवाई नहीं,मऊ प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

भू-माफिया पर कार्रवाई नहीं,मऊ प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

मऊ। जनपद में एक भू-माफिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है,जिसमें शिकायतकर्ता ने धोखाधड़ी कर अनुसूचित जाति के लोगों की जमीनें हड़पने का आरोप एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज कराया है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, राजा बाबू प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहा है।
बताया गया है कि शकील अहमद पुत्र मुर्तुजा सेठ निवासी प्रेमाराय थाना कोतवाली जनपद मऊ कथित भू-माफिया जालसाजी और शातिराना दिमाग का परिचय देते हुए इमाम फाउंडेशन ट्रस्ट से जुड़कर दलित समुदाय से जुड़े कई लोगों की जमीनों को बगैर परमिशन के और एग्रीमेंट के तहत लेकर प्लाटिंग का खेल किया है। बताया गया है कि शकील अहमद इमाम फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम पर मौजा बढुआ गोदाम तहसील सदर मऊ में कुल छोटे भू-माफियाओं के साथ मिलकर जमीन की प्लॉटिंग कर बेच रहा है। जो की गैर कानूनी और इससे सरकारी राजस्व की बड़ी हानि हो रही है।
शिकायत के अनुसार शकील अहमद ने मौजा बढुआ गोदाम में बगेदू सुरजन पुत्रगण लुरखुर और राधा पुत्र जगन जो कि (अनुसूचित जाति चमार हैं) के आराजी नंबर 662 रकबा 1 एकड़ 160 कड़ी जमीन को विगत 12 जून 1991 को धोखाधड़ी से बा अनुमति के अपने और अपने भाइयों के नाम बैनामा करा लिया।जो अनुसूचित जाति के इन लोग को गैर-अनुसूचित जाति का दिखाकर छल-कपट और बेईमानी की।
जनपद के आला हाकिम की अनुमति के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर यह कार्य किया गया। इसी तरह देऊ पुत्र चम्हित और बगेदू पुत्र चिखुरी की आराजी नंबर 352 रकबा 185 कड़ी और आराजी नंबर 344 रकबा 287 कड़ी भूमि को भी अपने भाइयों के नाम बैनामा लिया ।
इसके अतिरिक्त मुन्नू पुत्र गनपत और श्रीराम पुत्र फागू उर्फ लालू आदि अनुसूचित जाति का न होने का झूठा दावा कर फर्जी दस्तावेज और गवाहों की मिलीभगत से अपने और अपने भाइयों के नाम करवा लिया।
उक्त शकील अहमद ने 17 मार्च 2005 को आराजी नंबर 665 रकबा 1.004 हेक्टेयर भूमि में से 81 एयर भूमि प्रभुनाथ पुत्र निर्मल (अनुसूचित जाति चमार) को अनुसूचित जाति का न दिखाकर बैनामा कराया। शेष रकबा अन्य अनुसूचित जाति चमार की भूमियों को बिना बैनामा कराए ही धोखाधड़ी से कूटरचित दस्तावेज के आधार पर खतौनी में अपना नाम दर्ज करवा लिया है,ऐसी शिकायत प्राप्त हुई है जो एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
किंतु विडंबना यह है कि इतने बड़े फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है, जिससे संबंधित उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ खड़े हो रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *