आजमगढ़।जनपद का बहुचर्चित तरवां ब्लॉक इन दिनों भ्रष्टाचार और बदहाली को लेकर चर्चा में है। ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा रस्तीपुर से विकास दावों की पोल खोलता एक गंभीर मामला सामने आया है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गांव में साफ-सफाई के नाम पर व्यवस्था पूरी तरह शून्य है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि नालियों और शौचालय का गंदा पानी खुलेआम सड़कों पर बह रहा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है।ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि गांव में तैनात सफाईकर्मी अपनी ड्यूटी करने के बजाय सिर्फ ग्राम प्रधान के घर पर ‘रिश्तेदारी’ निभाकर चला जाता है। उसे गांव की गलियों और नालियों की सफाई से कोई सरोकार नहीं है। इस लापरवाही के कारण खुली और बजबजाती नालियों से चौबीसों घंटे भयानक बदबू आ रही है, जिससे इलाके में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों के फैलने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।लोगों का कहना है कि सूबे की योगी सरकार गरीबों और ग्रामीणों के हित में दिन-रात काम कर रही है और साफ-सफाई के लिए करोड़ों का बजट दे रही है। इसके विपरीत रस्तीपुर के ग्राम प्रधान और सचिव मिलकर सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं।आरोप है कि विकास के नाम पर आने वाले सरकारी धन जैसे डस्टबिन, स्ट्रीट लाइट और सीमेंटेड बेंच को केवल कागजों पर दिखाकर बखूबी ठिकाने लगा दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक यदि उच्चाधिकारियों द्वारा इस वित्तीय हेराफेरी की निष्पक्ष जांच कराई जाए,तो संबंधित ब्लॉक के जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे। इधर कुछ समय से सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह मुख्य रास्तों पर गंदगी और नाली का पानी फैला हुआ है।अब क्षेत्र की जनता की निगाहें आजमगढ़ के तेज-तर्रार जिलाधिकारी रवींद्र कुमार पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस वायरल वीडियो और जनता की समस्या का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे। देखना यह होगा कि भ्रष्ट जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।


