मऊ। जनपद के चिरैयाकोट स्थित खाकी बाबा कुटी पर हर साल शरद पूर्णिमा के दिन लगने वाला पारम्परिक मेला अब धीरे -धीरे आधुनिक होता जा रहा है,और अब चिरैयाकोट की पहचान का आधार बन रहा है।अतीत में सायंकाल को सम्पन्न होने वाला मेला अब देर रात तक चलता है,जिसे सकुशल सम्पन्न कराने में पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी चिरैयाकोट का प्रसिद्ध ऐतिहासिक मेला एक नई रौनक और भव्यता के साथ मंगलवार को प्रारंभ हुआ और देर रात तक चलते हुए सकुशल समापम की ओर बढ़ रहा है।
अतीत की बात करें तो लगभग पचास वर्ष पहले,तो यह मेला “कुटिया का मेला” नाम से मशहूर था,

और उस समय ख़ाकी बाबा कुटी के आस-पास के किसान,वे चाहे किसी भी धर्म या समुदाय से रहे मेले के प्रति श्रद्धा भाव रखते हुए अपनी ज़मीनें खाली रखते थे।
आज वही परंपरा चिरैयाकोट की पहचान बन चुकी है। पूरा नगर मेले की चकाचौंध, रोशनी और लोगों के उत्साह से जगमगा रहा है। मेला केवल व्यापार का नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, संस्कृति और आस्था का उत्सव बन चुका है।
हालाँकि अब आधुनिकता यहां भी अपना पैर फैला चुकी है जो और भी रौनक और उमंग दे रही है।यहां प्रदर्शनी में लगे बड़े-बड़े झूले,दुकानों की रौनक और भीड़ का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि चिरैयाकोट का मेला अब भी उतना ही जीवंत है जितना पहले था। लेकिन इस सारी व्यवस्था में प्रशासन का योगदान बहुत ही सराहनीय रहा है।


