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पत्रकार के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी के आरोपी का शांति भंग में चालान

मऊ। जनपद के चिरैयाकोट थानान्तर्गत स्थित एक पत्रकार के खिलाफ अभद्र और जातिसूचक टिप्पणी करने के मामले का सुलह-समझौते के बाद पुलिस द्वारा समाप्त करा दिया गया है।मामले में पुलिस प्रशासन की मध्यस्थता के बाद आरोपी ने लिखित माफ़नामा सौंपा जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विभिन्न शर्तों पर सुलहनामा तैयार हुआ।

मिली खबर अनुसार चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 10 (दरियापट्टी) निवासी पत्रकार विजय उपाध्याय ने जनहित के मुद्दों पर पत्रकारिता करते हुए गत 21 अप्रैल 2026 को  एक खबर चलाया जिससे असंतुष्ट होकर हिमांशु यादव नामक युवक ने पत्रकार के फेसबुक अकाउंट पर जाकर आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणी की थी।इसी बात को लेकर पत्रकार ने तत्कालीन थानाध्यक्ष को शिकायत पत्र सौंपा था।

बताते हैं कि पहली शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के बाद, आरोपी ने पुन: 18 मई को पत्रकार विजय उपाध्याय की अन्य खबर पर सार्वजनिक रूप से अश्लील गालियां और जातिवादी टिप्पणी को पोस्ट किया,तब पत्रकार ने अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और जातीय विद्वेष फैलाने के प्रयास के खिलाफ दोबारा थाने में नामजद प्रार्थना पत्र देकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

मामले की गंभीरता और सोशल मीडिया पर बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए  आरोपी हिमांशु यादव को धर दबोचने के उपरांत शांति भंग की आशंका के तहत धारा 151 में चालान करके  उपजिलाधिकारी न्यायालय मुहम्मदाबाद गोहना में पेश किया।

तत्पश्चात न्यायालय और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच लिखित सुलहनामा तैयार हुआ। इसमें आरोपी द्वारा भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की सहित चार मुख्य शर्तें तय की गईं।

आरोपी हिमांशु पुत्र हरिश्चंद्र यादव, निवासी कटता थाना तरवां, जनपद आजमगढ़ ने सौ रुपये के वैधानिक स्टांप पेपर पर लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए पत्रकार से माफी मांगी।

तथा अपनी उसी फेसबुक आईडी से इस हस्ताक्षरित सुलहनामें की कॉपी सार्वजनिक रूप से साझा करने की बात स्वीकार कर लिया।

लिखित सुलहनामें में आरोपी ने स्पष्ट रूप से वचन दिया  कि भविष्य में उनके द्वारा किसी भी व्यक्ति या पत्रकार के विरुद्ध सोशल मीडिया अथवा सार्वजनिक मंच पर ऐसी कोई भी अमर्यादित टिप्पणी नहीं की जाएगी। इस समझौते के बाद पिछले डेढ़ महीने से चल रहा यह विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है।

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